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3 तकनीकें तुलना: सही डीआरएस

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले को तकनीकी प्रमाणों से जांचने की प्रक्रिया है। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसका संचालन आईसीसी के नियमों के तहत होता है और ह...

16 अक्टूबर 2026 5 min read
3 तकनीकें तुलना: सही डीआरएस
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3 तकनीकें तुलना: सही डीआरएस

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले को तकनीकी प्रमाणों से जांचने की प्रक्रिया है। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसका संचालन आईसीसी के नियमों के तहत होता है और हॉक-आई, अल्ट्राएज तथा कभी-कभी हॉट स्पॉट इसके प्रमुख साधन हैं। आम तौर पर खिलाड़ी को समीक्षा मांगने के लिए लगभग 15 सेकंड मिलते हैं। टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में प्रत्येक टीम को प्रायः पारी में दो असफल समीक्षाएं, जबकि ट्वेंटी-20 में एक असफल समीक्षा मिलती है; प्रतियोगिता की शर्तें निर्णायक होती हैं। एल्बीडब्ल्यू फैसले में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट तीनों जांचे जाते हैं, पर सीमांत स्थिति में अंपायर कॉल मूल फैसला बनाए रखती है। डीआरएस का उद्देश्य हर निर्णय बदलना नहीं, बल्कि स्पष्ट मानवीय गलती सुधारना है। इसलिए समीक्षा लेने से पहले गेंद की दिशा, बल्ले का संपर्क और उपलब्ध समीक्षाओं की संख्या तुरंत जांचें।

जब आप टीवी पर बल्लेबाज को दोनों हाथों से “टी” बनाते देखते हैं, तो अक्सर मान लेते हैं कि फैसला अब तकनीक ही करेगी। यह धारणा अधूरी है। कप्तान को सेकंडों में निर्णय लेना होता है, स्क्रीन पर क्रमशः ध्वनि, संपर्क और गेंद की दिशा दिखाई जाती है, और अंततः तीसरा अंपायर नियमों के अनुसार निष्कर्ष देता है। मित्र, केवल बड़ी स्क्रीन देखकर समीक्षा मांगना रणनीति नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में कप्तान दोनों हाथों से समीक्षा का टी संकेत देते हुए

आईसीसी की नियमावली और मैच की खेल-शर्तें हर समीक्षा की सीमा तय करती हैं। डीआरएस को समझने के लिए केवल हॉक-आई का नाम याद रखना पर्याप्त नहीं; यह भी देखना होता है कि कौन-सा प्रमाण निर्णायक है और कौन-सा प्रमाण अनुमान की सीमा में आता है।

इस विषय की मूल शब्दावली के लिए क्रिकेट नियमों की शुरुआती मार्गदर्शिका पढ़ना उपयोगी रहेगा।

क्या तुलना की गई?

तीन प्रमुख तकनीकों—हॉक-आई बॉल ट्रैकिंग, अल्ट्राएज और हॉट स्पॉट—की तुलना इस आधार पर की जाती है कि वे गेंद की स्थिति, बल्ले से संपर्क और टकराव की गर्मी में से किस तथ्य को सबसे विश्वसनीय ढंग से दिखाती हैं। हॉक-आई मुख्यतः एल्बीडब्ल्यू के लिए, अल्ट्राएज कैच और बल्ले के किनारे के लिए, तथा हॉट स्पॉट संपर्क के दृश्य संकेत के लिए उपयोगी है।

यह तुलना डीआरएस को “एक कैमरा फैसला” समझने की आम भूल सुधारती है। प्रत्येक तकनीक का अपना उद्देश्य, सीमितता और प्रमाण-स्तर है।

डीआरएस में सामान्य समीक्षा क्रम इस प्रकार समझें:

  1. मैदानी अंपायर का मूल फैसला दर्ज होता है।
  2. खिलाड़ी या कप्तान निर्धारित समय में “टी” संकेत देता है।
  3. तीसरा अंपायर उपलब्ध फुटेज, ध्वनि और बॉल ट्रैकिंग देखता है।
  4. यदि स्पष्ट प्रमाण मिले, तो फैसला बदला जाता है।
  5. यदि प्रमाण निर्णायक न हो, तो खेल-शर्तों के अनुसार मूल फैसला कायम रहता है।

एल्बीडब्ल्यू नियम और अंपायर कॉल की विस्तृत व्याख्या

आईसीसी के अनुसार तीसरे अंपायर का काम केवल अंतिम चित्र दिखाना नहीं, बल्कि उपलब्ध तकनीकी प्रमाण को खेल के नियमों से जोड़ना है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की खेल-शर्तों में समीक्षा प्रक्रिया, समय-सीमा और समीक्षा बचने के नियम प्रतियोगिता के अनुसार निर्धारित होते हैं। इसलिए 2026 में किसी टूर्नामेंट का नियम पढ़े बिना हर प्रारूप पर एक ही संख्या लागू करना खतरनाक है।

डीआरएस का वास्तविक मूल्य उस स्थिति में दिखता है जहां गेंद बल्ले को छूकर विकेटकीपर तक जाती है या एल्बीडब्ल्यू में गेंद स्टंप के किनारे से गुजरती प्रतीत होती है। यहां तकनीक निर्णय को मजबूत करती है, लेकिन तकनीक अंपायर की जगह पूरी तरह नहीं लेती।

आगे बढ़ने से पहले समीक्षा प्रक्रिया का आधिकारिक ढांचा देखना चाहते हैं? नीचे दिए गए विकल्प से संबंधित जानकारी देखें।

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डीआरएस की स्थापना और पहली समझ कैसी बनती है?

डीआरएस की पहली समझ यह होनी चाहिए कि समीक्षा एक नियंत्रित जांच है, स्वतः मिलने वाला दूसरा फैसला नहीं। मैदानी अंपायर का निर्णय प्रारंभिक संदर्भ रहता है, जबकि तीसरा अंपायर रीप्ले, ध्वनि, बॉल ट्रैकिंग और खेल-शर्तों को क्रम से जांचता है।

समीक्षा की शुरुआत में बल्लेबाज या कप्तान को मैदानी अंपायर के निर्णय के बाद लगभग 15 सेकंड के भीतर संकेत देना होता है। समय समाप्त होने के बाद किया गया संकेत स्वीकार नहीं किया जाता, भले ही टीवी रीप्ले बाद में संदेह पैदा करे। यही वह व्यावहारिक बिंदु है जिसे दर्शक अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

समीक्षा के दौरान सामान्यतः ये प्रश्न पूछे जाते हैं:

  • क्या गेंद ने बल्ले या दस्ताने को छुआ?
  • क्या गेंद पैड से टकराने से पहले बल्ले से लगी?
  • एल्बीडब्ल्यू में गेंद कहां पिच हुई?
  • पैड से टकराते समय इम्पैक्ट विकेटों की सीध में था?
  • गेंद विकेटों से टकराती या पूरी तरह चूकती?

अल्ट्राएज में ध्वनि-तरंग और वीडियो का मेल महत्वपूर्ण है। गेंद के बल्ले के पास पहुंचने के ठीक क्षण पर हल्की ध्वनि दिखे, तो तीसरा अंपायर संपर्क की संभावना पर विचार करता है; केवल दृश्य निकटता पर्याप्त प्रमाण नहीं मानी जाती। इसीलिए धीमी गति के फुटेज को पूरे अनुक्रम के साथ देखना जरूरी है।

तीसरे अंपायर के नियंत्रण कक्ष में कई स्क्रीन पर अल्ट्राएज और बॉल ट्रैकिंग दिखाई देती हुई

आईसीसी की समीक्षा-प्रणाली में “स्पष्ट और निर्णायक प्रमाण” का सिद्धांत केंद्रीय है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम भी अंपायरिंग निर्णयों को खेल की विधिक संरचना के भीतर रखते हैं। “तकनीक का उपयोग निर्णय को अधिक सटीक बनाने के लिए है, अंपायरिंग के मूल सिद्धांत हटाने के लिए नहीं”—इस विचार को नियमों की व्याख्या में बार-बार महत्व दिया जाता है।

एक अहम सूचना यह है कि अल्ट्राएज हर प्रकार के किनारे को समान स्पष्टता से नहीं दिखाता। बल्ले, दस्ताने, पैड और जमीन से पैदा होने वाली ध्वनियां अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए तीसरा अंपायर ध्वनि की ऊंचाई, समय और गेंद की स्थिति को साथ पढ़ता है।

डीआरएस कहां प्रभावी साबित होता है?

डीआरएस सबसे प्रभावी तब होता है जब उपलब्ध प्रमाण स्पष्ट हो और तकनीक सीधे विवादित तथ्य को माप रही हो। अल्ट्राएज बल्ले के किनारे, हॉक-आई गेंद के भविष्य के रास्ते और वीडियो रीप्ले कैच की वैधता पर उपयोगी प्रमाण देते हैं। इस संयोजन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट केंद्रों में गलत निर्णयों की दृश्य जांच को अधिक व्यवस्थित बनाया है।

एल्बीडब्ल्यू समीक्षा इसका सबसे जटिल उदाहरण है। हॉक-आई तीन चरणों में गेंद का आकलन करता है: पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट। यदि गेंद विकेटों की ओर जाती दिखती है, लेकिन अनुमानित क्षेत्र मूल निर्णय की सीमा में रहता है, तो अंपायर कॉल लागू हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि तकनीक विफल हुई; इसका अर्थ है कि खेल-शर्तों ने संदेह की स्थिति में मैदानी अंपायर के निर्णय को प्राथमिकता दी।

इन परिस्थितियों में डीआरएस का लाभ विशेष रूप से मजबूत रहता है:

  • साफ बल्ले का किनारा, जबकि अंपायर ने नॉट आउट दिया हो।
  • गेंद पैड से पहले बल्ले से लगी हो।
  • कैच जमीन से पहले सुरक्षित हाथों में लिया गया हो।
  • गेंद स्टंप से बहुत बाहर जा रही हो।
  • मैदानी निर्णय और वीडियो प्रमाण में स्पष्ट विरोध हो।

एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सफल समीक्षा और अंपायर कॉल का प्रभाव समीक्षा की उपलब्ध शेष संख्या पर प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार अलग तरह से दर्ज हो सकता है। सामान्य अंतरराष्ट्रीय शर्तों में अंपायर कॉल पर समीक्षा बची रहती है, जबकि असफल निर्णायक समीक्षा घटती है; फिर भी 2026 के किसी विशिष्ट टूर्नामेंट की पुस्तिका को अंतिम स्रोत मानें।

आईपीएल समाचार पर मैच समीक्षा पढ़ते समय यही अंतर देखें: “फैसला बदला” और “समीक्षा सफल मानी गई” हमेशा एक ही बात नहीं होते। यह छोटा-सा अंतर, दोस्तों, स्कोरबोर्ड से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

क्या आप एल्बीडब्ल्यू और कैच की समीक्षा का अंतर जल्दी समझना चाहते हैं? इस संदर्भ सामग्री को देखें।

विवरण देखें

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच में विशाल स्क्रीन पर एल्बीडब्ल्यू बॉल ट्रैकिंग का ग्राफिक

डीआरएस कहां सीमित रह जाता है?

डीआरएस की सीमा वहां सामने आती है जहां तकनीकी प्रमाण अनुमान, दृश्य अस्पष्टता या उपकरण की उपलब्धता पर निर्भर हो। हॉट स्पॉट हर मैदान और हर प्रसारण व्यवस्था में समान रूप से उपलब्ध नहीं होता, इसलिए इसे डीआरएस का अनिवार्य हिस्सा समझना गलत है। इसके विपरीत, अल्ट्राएज और बॉल ट्रैकिंग की उपलब्धता भी प्रतियोगिता, प्रसारण साझेदार और खेल-शर्तों पर निर्भर कर सकती है।

अंपायर कॉल सबसे अधिक बहस पैदा करने वाला क्षेत्र है। मान लीजिए हॉक-आई गेंद को स्टंप के बहुत छोटे हिस्से से टकराता दिखाता है, लेकिन परिणाम निर्धारित सीमा के करीब है। ऐसे मामले में मूल नॉट आउट या आउट फैसला कायम रह सकता है। दर्शक इसे विरोधाभास मानते हैं, मगर नियम का उद्देश्य तकनीकी अनुमान की सीमा में मैदानी अंपायर की जिम्मेदारी को सुरक्षित रखना है।

मैदानी निर्णय की गुणवत्ता भी डीआरएस को प्रभावित करती है। यदि अंपायर ने आउट दिया और समीक्षा में गेंद का प्रभाव नियम के सीमांत क्षेत्र में आता है, तो “अंपायर कॉल” मूल आउट को बनाए रख सकती है। इसलिए कप्तान को केवल तकनीकी संभावना नहीं, मूल निर्णय की दिशा भी समझनी चाहिए।

डीआरएस की प्रमुख सीमाएं इस प्रकार हैं:

  • हर प्रसारण में हॉट स्पॉट उपलब्ध नहीं होता।
  • ध्वनि-आधारित प्रमाण पृष्ठभूमि शोर से प्रभावित हो सकता है।
  • बॉल ट्रैकिंग अनुमानित प्रक्षेपवक्र दिखाती है, वास्तविक भविष्य नहीं।
  • समीक्षा की समय-सीमा कप्तान पर तत्काल दबाव डालती है।
  • प्रारूप और प्रतियोगिता के अनुसार समीक्षा संख्या बदल सकती है।

एक व्यावहारिक जानकारी और: समीक्षा मांगने के बाद कप्तान निर्णय वापस नहीं ले सकता, क्योंकि संकेत आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर देता है। यदि गेंद नो-बॉल थी, तो कैच समीक्षा की दिशा बदल सकती है; लेकिन पहले नो-बॉल की पुष्टि जरूरी होती है। इसी कारण गेंद की वैधता जांच कई कैच और स्टंपिंग मामलों में शुरुआती चरण बनती है।

क्रिकेट में नो-बॉल, कैच और स्टंपिंग समीक्षा के नियम

क्या डीआरएस का उपयोग करना उचित है?

डीआरएस का उपयोग उचित है, लेकिन केवल तब जब टीम के पास स्पष्ट दृश्य या रणनीतिक कारण हो; हर अपील पर समीक्षा लेना सीमित संसाधन को नष्ट कर सकता है। टेस्ट और एकदिवसीय मैचों में प्रायः दो असफल समीक्षाएं, तथा ट्वेंटी-20 में प्रायः एक असफल समीक्षा का ढांचा देखा जाता है, पर अंतिम संख्या आईसीसी या संबंधित लीग की खेल-शर्तों से तय होती है।

कप्तान को समीक्षा से पहले तीन त्वरित संकेतों पर ध्यान देना चाहिए: गेंद-बल्ले का संपर्क, गेंद की पिचिंग और फील्डर के हाथों की स्थिति। विकेटकीपर की आवाज उपयोगी हो सकती है, मगर वह तकनीकी प्रमाण नहीं है। दूसरी ओर, गेंदबाज का आत्मविश्वास भी अकेला कारण नहीं होना चाहिए—मैच का दबाव निर्णय को धुंधला कर देता है।

समीक्षा बचाने की रणनीति के लिए यह सरल क्रम अपनाएं:

  1. विकेटकीपर से संपर्क के बारे में तुरंत पूछें।
  2. गेंदबाज से पिचिंग और पैड के प्रभाव की जानकारी लें।
  3. स्क्रीन पर उपलब्ध शुरुआती रीप्ले देखें।
  4. शेष समीक्षाएं और मैच की स्थिति गिनें।
  5. समय-सीमा के भीतर ही कप्तान अंतिम संकेत दे।

डीआरएस जुआ, भविष्यवाणी या भावनात्मक अपील नहीं है; यह प्रमाण-आधारित जोखिम प्रबंधन है। इसी कारण आईपीएल समाचार की रणनीति-आधारित मैच कवरेज में समीक्षा संख्या, ओवर, बल्लेबाज का हाथ और गेंद की लाइन जैसे तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं। उदाहरण के लिए, अंतिम ओवर में एक बची समीक्षा का मूल्य शुरुआती पावरप्ले से अलग हो सकता है, क्योंकि विकेट का प्रभाव और उपलब्ध गेंदें बदल जाती हैं।

“अंपायर कॉल” को हार या तकनीक की असफलता कह देना भी गलत निष्कर्ष है। यह नियम-निर्धारित सीमा है, जो अंपायर के मूल निर्णय और तकनीकी अनुमान के बीच संतुलन बनाती है। इसलिए डीआरएस उपयोगी है, पर पूर्ण निश्चितता की मशीन नहीं।

अंतिम रणनीतिक सार समझने के लिए यह संक्षिप्त मार्गदर्शन उपयोगी रहेगा।

रणनीति समझें

कप्तान और विकेटकीपर मैदान पर चर्चा करते हुए, पृष्ठभूमि में समीक्षा संकेत की बड़ी डिजिटल स्क्रीन

निष्कर्षतः, क्रिकेट में डीआरएस तीन अलग तकनीकी प्रमाणों को खेल-शर्तों और अंपायर के मूल फैसले के साथ जोड़ता है। हॉक-आई गेंद का रास्ता, अल्ट्राएज संपर्क की ध्वनि और हॉट स्पॉट टकराव का तापीय संकेत दिखा सकते हैं, लेकिन कोई भी साधन हर परिस्थिति में निर्णायक नहीं होता। 15 सेकंड की समय-सीमा, सीमित समीक्षा और अंपायर कॉल को समझना दर्शक तथा कप्तान दोनों के लिए आवश्यक है। 2026 में किसी मैच का सही विश्लेषण करने से पहले आईसीसी, आईपीएल या संबंधित प्रतियोगिता की ताजा खेल-शर्तें अवश्य देखें।

क्या आप क्रिकेट की तकनीकी रणनीतियों पर और तथ्यपरक जानकारी चाहते हैं? यहां से आगे पढ़ें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में डीआरएस क्या है?

उत्तर: डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी जांच करने की प्रक्रिया है। इसमें तीसरा अंपायर वीडियो रीप्ले, अल्ट्राएज, हॉक-आई और उपलब्ध होने पर हॉट स्पॉट देखता है। बल्लेबाजी टीम का खिलाड़ी या फील्डिंग कप्तान आम तौर पर लगभग 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से “टी” संकेत देता है। इसका उद्देश्य हर फैसला बदलना नहीं, बल्कि स्पष्ट गलती सुधारना है। आईसीसी की खेल-शर्तें समीक्षा संख्या, समय-सीमा और अंपायर कॉल का प्रभाव निर्धारित करती हैं।

प्रश्न: डीआरएस लेने के लिए क्या करना पड़ता है?

उत्तर: खिलाड़ी या कप्तान को मैदानी अंपायर के फैसले के बाद निर्धारित समय के भीतर दोनों हाथों से “टी” संकेत देना पड़ता है। इसके बाद तीसरा अंपायर पहले गेंद की वैधता, फिर बल्ले या पैड के संपर्क और अंत में संबंधित नियम की जांच करता है। कप्तान को संकेत से पहले विकेटकीपर, गेंदबाज और उपलब्ध रीप्ले से जानकारी लेनी चाहिए। संकेत आधिकारिक रूप से दर्ज होने के बाद समीक्षा सामान्यतः वापस नहीं ली जा सकती।

प्रश्न: हॉक-आई और अल्ट्राएज में क्या अंतर है?

उत्तर: हॉक-आई गेंद के प्रक्षेपवक्र और स्टंप तक उसके संभावित रास्ते का अनुमान दिखाता है, जबकि अल्ट्राएज गेंद और बल्ले के संपर्क से जुड़ी ध्वनि का विश्लेषण करता है। एल्बीडब्ल्यू मामलों में हॉक-आई के पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट चरण महत्वपूर्ण होते हैं। कैच या किनारे के मामलों में अल्ट्राएज सहायता देता है, लेकिन ध्वनि को वीडियो क्रम के साथ पढ़ना आवश्यक है। दोनों तकनीकें अलग प्रश्नों का उत्तर देती हैं।

प्रश्न: अंपायर कॉल होने पर समीक्षा खत्म होती है?

उत्तर: सामान्य अंतरराष्ट्रीय खेल-शर्तों में अंपायर कॉल का परिणाम अक्सर समीक्षा को बचाए रखता है, लेकिन अंतिम नियम प्रतियोगिता के अनुसार जांचना चाहिए। एल्बीडब्ल्यू में गेंद की पिचिंग, पैड पर इम्पैक्ट और विकेट से टकराने की संभावना सीमांत क्षेत्र में हो तो मैदानी अंपायर का मूल फैसला कायम रह सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हॉक-आई असफल हुआ। इसका मतलब है कि नियम ने अनिश्चित अनुमान में अंपायर के निर्णय को प्राथमिकता दी।

प्रश्न: डीआरएस की समीक्षा क्यों असफल हो जाती है?

उत्तर: समीक्षा तब असफल होती है जब तकनीकी प्रमाण मूल फैसले को बदलने के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं होता या समीक्षा नियमों के अनुसार निर्णय वही रहता है। उदाहरण के लिए, अल्ट्राएज में स्पष्ट किनारा न दिखे, कैच जमीन के बहुत करीब हो या एल्बीडब्ल्यू इम्पैक्ट अंपायर कॉल क्षेत्र में आए, तो फैसला कायम रह सकता है। नो-बॉल, समय-सीमा और गलत समीक्षा संकेत भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए भावनात्मक अपील को प्रमाण न समझें।

प्रश्न: टेस्ट, एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में कितनी समीक्षाएं मिलती हैं?

उत्तर: सामान्य अंतरराष्ट्रीय ढांचे में टेस्ट और एकदिवसीय मैचों में प्रत्येक टीम को पारी में प्रायः दो असफल समीक्षाएं, जबकि ट्वेंटी-20 में प्रायः एक असफल समीक्षा मिलती है। सफल समीक्षा या अंपायर कॉल पर समीक्षा बचने की व्यवस्था खेल-शर्तों में लिखी होती है। आईपीएल, आईसीसी प्रतियोगिता और द्विपक्षीय श्रृंखला में नियमों का संस्करण अलग हो सकता है। इसलिए मैच शुरू होने से पहले आधिकारिक प्रतियोगिता पुस्तिका देखना सबसे सुरक्षित तरीका है।

प्रश्न: क्या हॉट स्पॉट हर डीआरएस में उपलब्ध होता है?

उत्तर: नहीं, हॉट स्पॉट हर मैच या प्रसारण व्यवस्था में अनिवार्य रूप से उपलब्ध नहीं होता। यह तापीय कैमरों से गेंद और बल्ले या पैड के संपर्क का संकेत दिखाता है, लेकिन इसकी उपलब्धता तकनीकी व्यवस्था, मैदान और प्रतियोगिता के प्रसारण साझेदार पर निर्भर करती है। अल्ट्राएज और वीडियो रीप्ले कई मामलों में मुख्य प्रमाण बने रहते हैं। दर्शकों को हॉट स्पॉट न दिखने पर यह नहीं मानना चाहिए कि डीआरएस प्रक्रिया अधूरी या अमान्य है।

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पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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